ईवीएम के साथ छेड़छाड़ संभव नहीं



क्यों नहीं हो सकती है ईवीएम मशीन से छेड़छाड़, जानिए 8 जरूरी कारण

देश में पांच राज्यों में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाले दलों ने सीधे ईवीएम पर दोष मढ़ दिया है. ईवीएम पर दोष का मतलब बात चुनाव आयोग पर आ रही है. कहा जा रहा है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई है. अब चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. क्यों पढ़ें यह खास कारण-



1. ईवीएम में इंटरनेट का कोई कनेक्शन नहीं होता है, इसलिए इसे ऑनलाइन होकर हैक नहीं किया जा सकता.

2. किस बूथ पर कौन सा ईवीएम जायेगा, इसके लिए रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया होती है, अर्थात सभी ईवीएम को पहले लोकसभा वार फिर विधानसभा वार और सबसे अंत में बूथवार निर्धारित किया जाता है और पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले डिस्पैचिंग के समय ही पता चल पाता है कि उसके पास किस सीरीज का ईवीएम आया है. ऐसे में अंतिम समय तक पोलिंग पार्टी को पता नहीं रहता कि उनके हाथ में कौन सा ईवीएम आने वाला है.

3. बेसिक तौर पर ईवीएम में दो मशीन होती है, बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट. वर्तमान में इसमें एक तीसरी यूनिट वीवीपीएटी भी जोड़ दिया गया है, जो 8 सेकंड के लिए मतदाता को एक पर्ची दिखाता है जिसमें ये उल्लेखित रहता है कि मतदाता ने अपना वोट किस अभ्यर्थी को दिया है. ऐसे में अभ्यर्थी बूथ पर ही आश्वस्त हो सकता है कि उसका वोट सही पड़ा है कि नहीं।
अब कौन सी Evm इस बार Vvpat मशीन के साथ जुड़ेगी, यह आख़िरी  Randomisation के बाद ही तय होता है, और Randomisation की यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा अभिहित प्रेक्षकों की 
देख रेख में सम्पन्न होती है।।

4. वोटिंग के पहले सभी ईवीएम की गोपनीय जांच की जाती है और सभी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही ईवीएम को वोटिंग हेतु प्रयुक्त किया जाता है

5. सबसे बड़ी बात वोटिंग के दिन सुबह मतदान शुरू करने से पहले मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी द्वारा सभी उम्मीदवारों के मतदान केन्द्र प्रभारी या पोलिंग एंजेट के सामने मतदान शुरू करने से पहले मॉक पोलिंग की जाती है और सभी पोलिंग एंजेट से मशीन में वोट डालने को कहा जाता है ताकि ये जांचा जा सके कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट गिर रहा है कि नहीं. ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकि गड़बड़ी होगी तो मतदान के शुरू होने के पहले ही पकड़ ली जायेगी.

6. मॉक पोल के बाद सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एंजेट मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते है. इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद ही संबंधित मतदान केन्द्र में वोटिंग शुरू की जाती है. ऐसे में जो उम्मीदवार ईवीएम में टैंपरिंग की बात कर रहे हैं वे अपने पोलिंग एंजेट से इस बारे में बात कर आश्वस्त हो सकते है.

7. मतदान शुरू होने के बाद मतदान केन्द्र में मशीन के पास मतदाताओं के अलावा मतदान कर्मियों के जाने की मनाही होती है, वे ईवीएम के पास तभी जा सकते है जब मशीन की बैट्री डाउन या कोई अन्य तकनीकि समस्या होने पर मतदाता द्वारा सूचित किया जाता है. हर मतदान केन्द्र में एक मतदाता रजिस्टर बनाया जाता है -17 A , इस रजिस्टर में मतदान करने वाले मतदाताओं की डिटेल अंकित रहती है और रजिस्टर में जितने मतदाता की डिटेल अंकित होती है, उतने ही मतदाताओं की संख्या ईवीएम में भी होती है.

मतदान समाप्ति के बाद Evm सभी एजेंट्स के सामने सील की जाती है ।।
सभी एजेंट्स को सील पर अंकित नंबर दिया जाता है जिसको वो काउंटिंग शुरू होने के पहले मिलान करके आश्वस्त हो लेते हैं कि Evm की सील खुली नही है ।

अंदर की तरफ की सील , जो मतदान शुरू होने के ठीक पहले लगाईं जाती है, उसका नंबर भी एजेंट्स के पास होता है, और वो Evm खुलने पर उसका भी मिलान कर आश्वस्त होते हैं ।।
 काउंटिंग वाले दिन इनका आपस मे मिलान सभी एजेंट्स के सामने मतदान केंद्र प्रभारी (presiding officer) की रिपोर्ट के आधार पर होता है.

8. मतदान समाप्त होने के बाद सभी एजेंट्स के सामने क्लोज बटन दबा कर मतदान समाप्त किया जाता है, और तुरन्त ही उनके सामने उपरोक्त प्रक्रिया के अनुसार Evm सील कर दी जाती है।
एक बार क्लोज बटन दबा देने के बाद Evm तब तक अगला वोट नही लेती जब तक की ( Evm की सील तोड़ कर )Evm को रिसेट बटन दबा कर उसको Zero पर न ला दिया जाए ।

9. Evm में यह समय स्थायी रूप से दर्ज रहता है कि उसको आखिरी बार कब क्लोज किया गया।
सो, एक बार क्लोज बटन दबा कर मतदान समाप्त होने के बाद यदि दुबारा Evm खोली गयी तो पुराना सही समय प्रदर्शित नही होगा।

10.एक बार सीलबंद होने के बाद evm सीधे काउंटिंग स्थल पर ही खुलती है।
वहाँ भी सभी उम्मीदवारों के एजेंट्स रहते हैं।
पूरी काउंटिंग प्रक्रिया की निरन्तर वीडियोग्राफी होती है।।

सीलबन्द Evm जहां जिस सीलबन्द स्ट्रांग रूम में रखी जाती है, वहाँ भी 24 घण्टे cctv कैमरे लगे रहते हैं ।
यहां तक की सीलबन्द Evm को जब सीलबन्द स्ट्रांग रूम से काउंटिंग हेतु निकाल कर काउंटिंग स्थल पर लाया जाता है, तो भी उन सभी गलियारों में भी cctv लगी होती है जिनसे होकर सीलबन्द Evm गुजरती
है ।

11. सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम टैंपरिंग से संबंधित जितने भी मामले पहले आये उनमें से किसी भी मामले में ईवीएम में टैंपरिंग सिद्व नहीं हो पाई है.
स्वयं चुनाव आयोग 
आम लोगों को आंमत्रित करता है कि वे लोग आयोग जाकर ईवीएम की तकनीक को गलत सिद्व करने हेतु अपने दावे प्रस्तुत करें. लेकिन आज तक कोई भी दावा सही सिद्व नहीं हुआ है.


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अब मतदाता जागरूक है ।।
वह अपना फैसला लेने के लिए आजाद है। इस "आजादी" को सुरक्षित रखने के लिए चुनाव आयोग "जीरो टॉलरेन्स" पर कार्य करता है।

चुनाव के महायज्ञ में लगे सभी मतदान कार्मिक पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं ।
किसी को अपनी नौकरी नही गंवानी ।।

नेतागण अपनी हार की कुंठा अन्य लोगों पर दोषारोपण कर निकाल सकते हैं, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में लगे मतदान कार्मिकों पर इस तरह के आरोप केवल मानसिक दीवालियापन और मानसिक असंतुलन के उदाहरण मात्र हैं, और कुछ नही।।

मुख्य चुनाव आयुक्त 
श्री टी एन शेषन जी के कार्यकाल से ही चुनाव में पारदर्शिता और ईमानदारी काफी हद तक आने लगी ।।

और अब तो इस मुकाम तक पारदर्शिता आ चुकी है कि शक की कोई गुंजाइश ही न रही ।।

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